04 - " मैं आँगन का छोर "

HIndi Kavita written by Smt Varshaji Gehlot of Mt Abu

देखो कैसे लहरा रहा

      आपके आँगन का छोर।

यूँ जैसे चुपचाप, बिना मचाये शोर ।।

      देखो कैसे ......

आते जाते दर्शन माँगे,

दृष्टि मात्र से पकना चाहे।

      बिना फल फूल की,

      चिन्ता किये, चरण चढ़ना चाहे।

      देखो कैसे ......

अनायास जब फूल खिला,

मानो सब कुछ सहज मिला।

      तुम्ही खिले वन फूल,

      हम आँगन की धूल।

      देखो कैसे .....