Salient Points of PP Som Swamiji's Ashirvachan on Vyas Guru Poornima 2020

श्री व्यास गुरु पूर्णिमा महोत्सव, 5 जुलाई 2020, पर पूज्य श्री स्वामी संवित् सोमगिरिजी महाराज द्वारा प्रदत्त प्रवचन के कुछ बिंदु

जय शंकर

गुरु पूर्णिमा 2020 महोत्सव में पूज्य गुरुदेव द्वारा दिए गए प्रवचन के कुछ बिंदु

1) भा अर्थात प्रकाश रत अर्थात उसमे डूबा रहने वाला अतः भारत अर्थात एक गुरुकुल, एक यज्ञशाला, एक प्रयोगशाला, एक पाठशाला, एक मंदिर ।

2) परम पूज्य श्री जो हमें एक आग दे गए हैं वह आग बुझनी नहीं चाहिए ।

3) आज के इस पावन अवसर पर प्रत्येक साधक को एक व्रत लेना चाहिए उसे सदैव प्रश्नाकुल होना चाहिए ।

4) आज कोरोना के काल में यह कीटाणु है विषाणु है मानव निर्मित है या प्रकृति ने बनाया है जो भी हो कोरोना ने हमें बहुत कुछ सोचने को विवश किया है हम भारतीय संस्कृति से दूर होते चले जा रहे थे कोरोना ने हमें आत्म विश्लेषण का अवसर दिया है ।हमारे पारिवारिक रिश्तो में जो दरार आ गई थी उसे हटाने का भी अवसर दिया है। रामायण एवं महाभारत को देखकर बच्चों को संस्कारित होने का भी मौका मिला है

5) गुरु का एक व्यक्त रूप होता है एक अव्यक्त रूप होता है और एक व्यक्ताव्यक्त रूप होता है ।आज गुरु को हमने तमाशा बना दिया है । ईश्वर को भी हमने तमाशा बना दिया है । हम स्वयं इस तमाशे का अंग हो गए हैं हम दिशाहीन हो गए हैं हमारी भाषा, भूषा, भजन, भोजन, भोग सब बदल गया है ।

6) गलत शिक्षा के कारण पूरा समाज हिरण्याक्ष अर्थात सोने की दृष्टि वाला एवं हिरण्यकशिपु अर्थात भोग की दृष्टि वाला बनता जा रहा है । जब तक हम तपस्वी नहीं बनेंगे तब तक हमारे सारे उत्सव सारे आयोजन एक तमाशा बन जाएंगे ।

7) हमने वेद की उपेक्षा की है, गुरु तत्व को, वेदव्यास जी को, आचार्य शंकर को भुला दिया । गृहस्थ जीवन में जो ब्रह्मज्ञानी हुए तथा निवृत्ति मार्ग को अपनाते हुए जो ब्रह्म ज्ञानी हुए उन सब की उपासना करने हेतु यह गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व है।

8) सारा ब्रह्मांड एक तात्पर्य को लेकर रचित है उस तात्पर्य को समझना ही साधक की पहचान है ।

9) आचार्य शंकर द्वारा रचित मनीषा पंचक के पांच श्लोकों पर मनन चिंतन करना गुरु पूर्णिमा का एक उद्देश्य है जिसमें बताया गया है कि गुरु तत्व क्या है, शिष्य कौन है और गुरु पूर्णिमा का महत्व क्या है

10) जब तक हम ब्रह्म विद्या को जीवन के हर क्षेत्र में, आधार में नहीं रखेंगे तथा ब्रह्मविद्या को नहीं समझेंगे तब तक हम भटकते चले जाएंगे अशांत होते चले जाएंगे ।

11) आज हमारे तीर्थ सुरक्षित है क्या ? आचार्य शंकर ने जिन चार प्रमुख पीठों की स्थापना की थी, क्या वहां आज महापुरुषों द्वारा उन पीठों का संचालन हो रहा है ? वहां भी कितनी राजनीति आ गई है मुकदमे बाजी आ गई है क्योंकि हमने एक गुरु की उपेक्षा की गुरु कोई व्यक्ति नहीं होता गुरु तो काल से अतीत होता है गुरु हमेशा काल से परे होता है ।

12) चातुर्मास का समय केवल भंडारे करने, केवल पूजा पाठ करने के लिए नहीं है बल्कि तपस्या करने एवं समझ समझ कर पूरे विधि विधान से उपासना करने का समय है ।

13) जब भी हम सत्कर्म करते हैं । अपने स्वार्थ को छोड़कर अपने अहंकार को छोड़कर कोई कर्म करते हैं तो पूरा पर्यावरण पावस जाता है। निष्काम भाव से काम करने पर ही हम शरीर मन इंद्रियों के पार जाकर उस परम तत्व से एकाकार हो सकते हैं ।जो भी संवेदनशील होता है उसके अंदर भाव की उमड़न होती है ।

14) गुरु को आज हमने पेड़ सर्वेंट बना दिया है दुर्भाग्य से गुरु जी आज स्वयं को पेड़ सर्वेंट ही मान रहा है और उसके अंदर से शिष्य के प्रति प्रेम नहीं निकल रहा है ।

15) गुरु के ज्ञान की कोई कीमत नहीं होती जिस प्रकार मां के दूध की कोई कीमत नहीं होती । मां में कुछ राग द्वेष के कारण बालक के निर्माण में जो कमी हो जाती है उस कमी को जो दूर करता है उसे गुरु कहते हैं ।

16) प्रयास करके 16 संस्कारों को उन्हें जागृत करो 4 पुरुषार्थ, 4 आश्रम, 4 वर्ण को समझ - समझ कर साधना करो ।

17) हमेशा गर्व की अनुभूति करो कि मेरा भारत में जन्म हुआ और शांकरी परंपरा में जन्म हुआ उसमें भी स्त्री होना अत्यंत गर्व की बात है । हम प्रश्न आकुल होते नहीं हैं बस यंत्र वक्त पूजा करते चले जाते हैं और यंत्र वक्त ही जीते चले जाते हैं ।

चातुर्मास के प्रमुख नियम

’ एक ही स्थान पर रहकर नियमित रूप से सत्संग करना ।

’ यदि संभव हो और शक्ति हो तो केवल दूध पीकर ही चातुर्मास करना।

’ भोजन को सीमित कर देना आज तो हमने मन को और पेट को कचरा बना दिया है। शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गंध, चिंतन , भावना इन सब के द्वारा हम कचरा ही अंदर डालते जा रहे हैं।

’ डट कर काम करना है डटकर खाना नहीं है।

’ शरीर को तपाना है गीता में इसी दृष्टि से शारीरिक तप, वाणी का तप एवं मानसिक तप की व्याख्या की गई है परंतु तामसिक तप ना करें ।

’ अपने जप ए तप एवं ध्यान को बढ़ाएं ।

’ प्रतिदिन अग्निहोत्र करना ।

’ प्रतिदिन पंच महायज्ञ करो

’ परम पूज्य स्वामीश्री का काछोली, स्वरूपगंज में जो मंदिर बन रहा है उस हेतु सबको भेंट करनी है ताकि वहां भव्य मंदिर का निर्माण किया जा सके । 5 दिसंबर 2020 को उस का विधिवत उद्घाटन होना है मैं चाहता हूं कि वहां पर एक गुरुकुल का भी निर्माण हो ।